शनिवार, सप्टेंबर 21, 2019
   
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प्रभु! सतत मदंतर हासू दे

प्रभु! सतत मदंतर हासू दे।।
तुझ्या कृपेचा वसंतवारा
जीवनवनि मम नाचू दे।। प्रभु....।।

विश्वग्रंथी पानोपानी
दृष्टि तुजचि मम वाचू दे।। प्रभु....।।

ठायी ठायी तुजला पाहुन
उचंबळुन मन जाउ दे।। प्रभु....।।

-धुळे तुरुंग, मे १९३२

जागृत हो माझ्या रामा!


जागृत हो माझ्या रामा!
हे हृदयस्था! सुखधामा!।। जागृत....।।

तू भक्तजना आधार
तू ब्रह्मांडा आधार
हरि सकल मोहअंधार
जलदश्यामा!।। जागृत....।।

करि मन्मति निर्मळ पूत
भरि भक्ती ओतप्रोत
त्वद्ध्यान लागु दिनरात्र
सद्विश्रामा!।। जागृत....।।

लाविले तुजकडे डोळे
शतवार जाहले ओले
हे हृदय किती गहिवरले
घेता नामा।। जागृत....।।

मज नको मान धन कीर्ती
मज लौकिकाचि ना प्रीती
निज दाखव मंगल मूर्ती
पुरवी कामा।। जागृत....।।

-त्रिचनापल्ली तुरुंग, सप्टेंबर १९३०

पत्री